सम्पत्तियां (Assets) चिटठे के बाईं ओर सम्पत्तियां दिखाई जाती है कोई वस्तु या अधिकार जो चिटठे की आगामी अवधि अर्थात भविष्य के लिए लाभप्रद होती है संपत्ति कहलाती है
Cash in Hand, Cash at bank, Furniture & Fixture,Machinery,Debtors ,Bill Receivable, Closing Stock,
यदि व्यापार की सम्पत्तियां है क्योंकि इनका उपयोग चिटठे की तिथि के बाद भाविष्य में होता रहेगा
वर्गीकरण (Classification) विभिन्न सम्पत्तियो को दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है
(I)स्थायी सम्पत्तिया (Fixed Assets) ये वे सम्पत्तिया होती है जिन्हें लम्बे समय तक व्यापार में रखकर व्यापार का संचालन किया जाता है ये सम्पत्तिया व्यापार के संचालन में
सहयोग देने के उद्देश्य से क्रय की जाती है न कि विक्रय के उद्देश्य से ऐसी सम्पत्तियो के उदाहरण है भुमि व भवन मशीनरी फर्नीचर मोटर गाड़ी पेटेंट्स इत्यादि ये सम्पत्तिया काफी दीर्घ अवधि तक व्यापार में प्रयोग में लाई जाती है
चिट्ठे में स्थायी सम्पत्तियो का मूल्य उनके लागत मूल्य में से ह्रास खटाकर यानी (At Cost price less depreciation) दिखाया जाता है
(ii)चल सम्पत्तिया (Current Assets) ये व्यापार की वे सम्पत्तिया है जो पुनः बिक्री के लिये या नगद में परिवर्तन करने के लिए थोड़ी अवधि के लिए (temporarily) रखी जाती है कोई भी व्यापार ऐसी सम्पत्तियो को बेच कर ही न कि अपने पास रख कर लाभ कमाता है चल सम्पत्तिया के उदाहरण है अन्तिम स्ठाक ऋणियों से प्राप्त राशि प्राप्य विपश्र बैंक का शेष व्यापार के पास नकदी इत्यादि ये सम्पत्तिया एक प्रकार से स्थाई होती है एवं बदलती रहती है
इन्हें इसलिए परिभ्रमण संपत्तियों (Floating or circulating asseAs) भी कहते हैं चल संपत्तियों का लागत मूल्य या बाजार मूल्य जो भी कम होता है (Cost or market price whichever is less) पर मूल्यांकन किया जाता है
उपर्युक्त वर्गीकरण के अतिरिक्त संपत्तियों को मूर्त एवं अमूर्त संपत्तियों में वर्गीकृत किया जा सकता है
(ii)मूर्त संपत्तियां (tangible assets) ये वे संपतिया होती हैं जिन का भौतिक स्वरूप होता है जिन्हें देखा या अनुुभव किया जा सकता है भूमि व भवन स्कन्ध प्लाण्ट एवं मशीनरी आदि मूर्त संपत्तियां हैं
(ii)अमूर्त संपत्तियों (Intangible assets) ये वे संपत्तियां हैं जिनका कोई भौतिक अस्तित्व ना होते हुए भी व्यापार के लिए लाभप्रद होते हैं ऐसी संपत्तियों के उदाहरण हैं ख्याति पेटेंट व्यापार चिन्ह आदि
(II)दायित्व या देयताएं (Liabilities) व्यवसाय को विभिन्न सम्पत्तियां उपलब्ध कराने वालों के व्यवसाय के प्रति दावे (claim) देयताएं कहलाती है ये व्यक्ति या तो व्यापार का स्वामी हो सकता है या बाहरी व्यक्ति (outsider) इस प्रकार दायित्व को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है
(i)स्थायी देयतायें (Fixed liablLiabil) उन देयताओ को जिनका भुगतान दीर्घकाल में किया जाता है स्थायी देयताये कहते हैं जैसे दीर्घकाल ऋण दीर्घकालीन लेनदार आदि
(ii)चल देयताये है (current laibiliLiab) ये वे दायित्व है जिनका भुगतान अल्पावधि में करना होता है लेनदार देय बिल अदत्त व्यय आदि चल देयताओ के उदाहरण है
चिट्ठे में स्थायी सम्पत्तियो का मूल्य उनके लागत मूल्य में से ह्रास खटाकर यानी (At Cost price less depreciation) दिखाया जाता है
(ii)चल सम्पत्तिया (Current Assets) ये व्यापार की वे सम्पत्तिया है जो पुनः बिक्री के लिये या नगद में परिवर्तन करने के लिए थोड़ी अवधि के लिए (temporarily) रखी जाती है कोई भी व्यापार ऐसी सम्पत्तियो को बेच कर ही न कि अपने पास रख कर लाभ कमाता है चल सम्पत्तिया के उदाहरण है अन्तिम स्ठाक ऋणियों से प्राप्त राशि प्राप्य विपश्र बैंक का शेष व्यापार के पास नकदी इत्यादि ये सम्पत्तिया एक प्रकार से स्थाई होती है एवं बदलती रहती है
इन्हें इसलिए परिभ्रमण संपत्तियों (Floating or circulating asseAs) भी कहते हैं चल संपत्तियों का लागत मूल्य या बाजार मूल्य जो भी कम होता है (Cost or market price whichever is less) पर मूल्यांकन किया जाता है
उपर्युक्त वर्गीकरण के अतिरिक्त संपत्तियों को मूर्त एवं अमूर्त संपत्तियों में वर्गीकृत किया जा सकता है
(ii)मूर्त संपत्तियां (tangible assets) ये वे संपतिया होती हैं जिन का भौतिक स्वरूप होता है जिन्हें देखा या अनुुभव किया जा सकता है भूमि व भवन स्कन्ध प्लाण्ट एवं मशीनरी आदि मूर्त संपत्तियां हैं
(ii)अमूर्त संपत्तियों (Intangible assets) ये वे संपत्तियां हैं जिनका कोई भौतिक अस्तित्व ना होते हुए भी व्यापार के लिए लाभप्रद होते हैं ऐसी संपत्तियों के उदाहरण हैं ख्याति पेटेंट व्यापार चिन्ह आदि
(II)दायित्व या देयताएं (Liabilities) व्यवसाय को विभिन्न सम्पत्तियां उपलब्ध कराने वालों के व्यवसाय के प्रति दावे (claim) देयताएं कहलाती है ये व्यक्ति या तो व्यापार का स्वामी हो सकता है या बाहरी व्यक्ति (outsider) इस प्रकार दायित्व को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है
(i)स्थायी देयतायें (Fixed liablLiabil) उन देयताओ को जिनका भुगतान दीर्घकाल में किया जाता है स्थायी देयताये कहते हैं जैसे दीर्घकाल ऋण दीर्घकालीन लेनदार आदि
(ii)चल देयताये है (current laibiliLiab) ये वे दायित्व है जिनका भुगतान अल्पावधि में करना होता है लेनदार देय बिल अदत्त व्यय आदि चल देयताओ के उदाहरण है





0 Comments
Please do not inter any spam link in the comment box